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भारत ने आई. जी. ओ. टी. कर्मयोगी पर ए. आई.-संचालित सिविल सेवा प्रशिक्षण की शुरुआत की, जो शासन को भूमिका-आधारित शिक्षा में बदलने के लिए 1.5-2 करोड़ कर्मचारियों तक पहुंचता है।
8 जनवरी, 2026 को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने घोषणा की कि भारत ने आई. जी. ओ. टी. कर्मयोगी मंच के माध्यम से अपने सिविल सेवा प्रशिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता को एकीकृत किया है।
अब मंत्रालयों, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में डेढ़ से दो करोड़ सरकारी कर्मचारियों द्वारा उपयोग की जाने वाली इस प्रणाली में व्यक्तिगत, भूमिका-आधारित सीखने के लिए ए. आई. सारथी और ट्यूटर जैसे ए. आई. उपकरण हैं।
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मिशन कर्मयोगी के हिस्से के रूप में इस पहल का उद्देश्य शासन को नियम-आधारित से भूमिका-आधारित में बदलना है, जिससे स्थानांतरण के दौरान अनुकूलन क्षमता में वृद्धि होगी।
सिंह ने स्वदेशी विकास और संस्थागत सुधार पर जोर देते हुए मानव निर्णय को बदलने के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता के पूरक होने पर जोर दिया।
यह मंच डिजिटल इंडिया जैसे पहले के डिजिटल प्रयासों पर आधारित है, जिसमें विस्तारित क्षमता ढांचे और बहुभाषी सामग्री के लिए भविष्य की योजनाएं हैं।
India launched AI-powered civil service training on iGOT Karmayogi, reaching 1.5–2 crore employees, to shift governance to role-based learning.