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सुप्रीम कोर्ट ने 2007 से प्रणालीगत फंड डायवर्जन का हवाला देते हुए अनिल अंबानी समूह द्वारा कथित 1.5 लाख करोड़ रुपये की धोखाधड़ी पर अंतिम रिपोर्ट का आदेश दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व केंद्रीय सचिव ई. ए. एस. सरमा की जनहित याचिका के बाद अनिल अंबानी और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह (ए. डी. ए. जी.) से जुड़े बड़े पैमाने पर कॉर्पोरेट और बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपों की अपनी जांच पर सीलबंद स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए सी. बी. आई. और प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया है।
अदालत ने जोर देकर कहा कि नए नोटिस जारी करने और बॉम्बे उच्च न्यायालय के महापंजीयक के माध्यम से उचित सेवा का आदेश देने के बाद अंबानी और ए. डी. ए. जी. के लिए जवाब देने का यह अंतिम मौका है।
यह मामला, जो 2007-08 से धोखाधड़ी का आरोप लगाता है और जिसमें मोड़ दिए गए धन में डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक शामिल हैं, प्रणालीगत वित्तीय हेरफेर और संस्थागत मिलीभगत का दावा करता है।
वकील प्रशांत भूषण ने कथित बैंक सांठगांठ की जांच नहीं करने के लिए जांच की आलोचना की।
अदालत ने रिपोर्टों के आधार पर दस दिनों के बाद सुनवाई निर्धारित की।
Supreme Court orders final reports on alleged ₹1.5L cr fraud by Anil Ambani group, citing systemic fund diversion since 2007.