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भारत की शीर्ष अदालत ने 85 वर्षीय वी. के. नारायणन को अपमान करने के इरादे की कमी का हवाला देते हुए झंडे को उल्टा दिखाने के लिए आपराधिक आरोपों से मुक्त कर दिया।
बंबई उच्च न्यायालय ने 85 वर्षीय वी. के. नारायणन के खिलाफ 2017 के एक आपराधिक मामले को रद्द करते हुए फैसला सुनाया कि गणतंत्र दिवस के दौरान उनकी आवासीय सोसायटी की छत पर भारतीय ध्वज को उल्टा दिखाना राष्ट्र का अनादर करने के इरादे के सबूत के बिना अपराध नहीं है।
न्यायमूर्ति अश्विन भोबे ने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम में मानस रिया की आवश्यकता है, जो अनुपस्थित था, क्योंकि कोई सबूत नहीं था कि नारायणन ने झंडा फहराया या जानबूझकर उल्टा कर दिया।
अदालत ने नोट किया कि बिना शर्त माफी और अधिक उम्र के साथ अकेले उसकी उपस्थिति आपराधिक दायित्व स्थापित नहीं करती है।
अपर्याप्त सबूतों के कारण एफ़. आई. आर. और आरोप पत्र खारिज कर दिए गए।
India's top court cleared 85-year-old VK Narayanan of criminal charges for displaying the flag upside down, citing lack of intent to disrespect.